अनुराग कश्यप: जिसकी कहानियों में प्रेमिकाएं बिना 'परमीसन' हाथ छूने पर गरिया देती हैं !

  • शेयर करे
  • लेखक :
  • Subodh Mishra (एडिटोरियल टीम )

बॉलीवुड में अछे डायरेक्टर्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन ऐसी डायरेक्टर बहुत ही कम हैं जो अपने काम से फिल्मों की दिशा-दशा ही बदल दें। अनुराग कश्यप ऐसे ही डायरेक्टर हैं। उनकी फिल्मों ने बॉलीवुड को बहुत कुछ ऐसा दिया है जिसे बाकी डायरेक्टर्स ने भी अपनाना शुरू किया। उनका नाम लेते ही जो सबसे पहली चीज़ लोगों के दिमाग में आती हैं, वो हैं गालियां और खून-खराबे।

ये दो चीज़ें उनकी बहुत सारी फिल्मों में भर-भर के देखने को मिलती हैं। लेकिन अनुराग अपनी फिल्मों में ये चीज़ें जानबूझकर घुसाते हों ऐसा नहीं है। ये चीज़ें उनके किरदारों के अन्दर ही होती हैं और सच कहें तो इन्हें न दिखाना, फिल्म की कहानी और किरदारों के साथ नाइंसाफी होगी। लेकिन एक चीज़ जिसके बारे में सबसे कम बात की जाती है, वो है अनुराग कश्यप स्टाइल की लव स्टोरी। जी हां, अनुराग कश्यप की फिल्मों में लव-स्टोरी भी पाई जाती है। बल्कि अनुराग लव-स्टोरी फ़िल्में भी बनाते हैं। 14 सितम्बर 2018 को उनकी लव-स्टोरी फिल्म ‘मनमर्ज़ियां’ रिलीज़ होने वाली है। 

विक्की कौशल, तापसी पन्नू और अभिषेक बच्चन की इस फिल्म को लेकर हर तरफ बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट है। ये एक्साइटमेंट यूं ही नहीं, दरअसल अनुराग की फिल्मों में लव-स्टोरी और बॉलीवुड फिल्मों की तरह नहीं होतीं। अनुराग ने अभी तक दो फ़िल्में ‘मुक्काबाज़’ और ‘देव डी’, पूरी तरह प्यार को सेंटर में रखकर बनाई हैं। इसके अलावा उनकी बेहद पॉपुलर फिल्म ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ में फैज़ल (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) और मोहसिना (हुमा क़ुरैशी) की लव-स्टोरी बहुत लोगों को बहुत पसंद आई थी। इन तीनों ही फिल्मों में लव-स्टोरी बिल्कुल अलग किस्म की थी। ‘देव डी’ में पारो, चन्दा और देव के बीच एक लव ट्रायंगल था। 

देव और चन्दा की लव-स्टोरी का एक बड़ा हिस्सा सेक्स के नाम था। लेकिन यहां पर आम सोच से उलट, देव नहीं बल्कि पारो इस रिश्ते को निभाने में आगे थी। जैसे ही देव ने पारो को तंग करना शुरू किया, उसने शादी कर ली। ये अनुराग का स्टाइल है, वो प्रेम को किरदार की आत्मा पर हावी नहीं होने देते। सादी भाषा में कहें तो जब प्यार बोझ बनने लगे तो उसे उतार कर फेंक देना चाहिए। बॉलीवुड की सबसे पॉपुलर लव-स्टोरीज़ के आगे, अनुराग की लव स्टोरी का ये स्टाइल एक सीधा हमला था। वहीँ गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में एक सीन लोगों को बहुत पसंद आया था। जहां फैज़ल मौक़ा देखकर अपनाहाथ मोहसिना के हाथ पर रख देता है और मोहसिना उसे टोंकते हुए कहती है- ‘आपको परमिसन लेना चाहिए न !’ 

मोहसिना का ये कहना, बॉलीवुड लव-स्टोरीज़ में हीरोइन की बहुत बड़ी बगावत है। एक तरफ हमने गोविंदा, अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार जैसे एक्टर्स को बेधड़क हीरोइन का हाथ पकड़ते देखा है। बल्कि पॉपुलर बॉलीवुड फिल्मों में हीरो का, हीरोइन का हाथ पकड़ना एक ‘कूल’ चीज़ था। असल जिंदगी में भी बहुत से लोगों ने लड़की का हाथ पकड़ना, इश्क की शुरुआत मान लिया था। लेकिन यहीं पर अनुराग की मोहसिना बाग़ी हो जाती है। उसका कहना साफ़ है, उसने फैज़ल को ये हिंट दिया है कि वो भी पसंद करती है उसे। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि फैज़ल उसपर अपना हक जमाने लगे। फैज़ल को हर बात के लिए उससे परमिशन लेनी होगी, वो मोहसिना को ग्रांटेड न ले। ये अनुराग कश्यप का रोमांस है, जहां लड़की दबेगी नहीं, डरेगी नहीं। 

बल्कि वो अगर ‘मुक्काबाज़’ की जोया हुई, तो नाक भी तोड़ देगी। प्रेम बना रहेगा, ये दिल की बात है। लेकिन उससे पहले सेल्फ-रिस्पेक्ट आती है। वो ज्यादा ज़रूरी है। अनुराग की फिल्मों में प्रेमिकाएँ आत्म-समर्पण नहीं करतीं, प्रेमी से कराती हैं। और जूती मारकर, सर पे चढ़ते प्रेमियों का भूत उतारते हुए साफ़ कह देती हैं- बहुत हुआ सम्मन्न तुम्हारी...’

  • शेयर करे
This site uses cookies

This site and its partners use technology such as cookies to personalise content and ads and analyse traffic. By using this site you agree to its privacy policy. You can change your mind and revisit your choices at anytime in future.